रसूल ﷺ ने फ़रमाया कि मरने के बाद भी अज्र देने वाली सदक़ा होती है — पानी, इल्म और मस्जिद के ज़रिए नेकी चलती रहती है। भारत में वक़्फ़ बोर्ड और स्थानीय ट्रस्ट से यह काम होता है।
उदाहरण
- गाँव में हैंडपंप
- मस्जिद की पुस्तकालय
- छात्रवृत्ति कोष
- क़ुरआन का वितरण
भारत में
वक़्फ़ बोर्ड, स्थानीय ट्रस्ट — पहले जाँच करें, फिर दें; छोटी रकम से भी नेकी शुरू हो सकती है।
परिवार के लिए
वफ़ात के बाद उनके नाम से जारिया रखना — परिवार को सुकून मिलता है।
जब इंसान मर जाता है तो उसका अमल बंद — सिवाय तीन चीज़ों के।
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