रमज़ान में हाथ खुले — राशन पैकेट, खजूर, इफ़्तार का जमाव; यही मोहल्ले की ज़िंदगी है।
क्या दें
- राशन और खजूर
- मस्जिद के लिए इफ़्तार
- चिकित्सा कोष
- स्कूल की फ़ीस की मदद
कैसे व्यवस्थित करें
मस्जिद कमेटी, WhatsApp ग्रुप, युवा — सब मिलकर; लखनऊ की तहज़ीब: पहले पड़ोसी।
असर
एक इफ़्तार से दस परिवार — यह सदक़ा का असर है जो दिखता है।
जो रोज़ेदार को खाना खिलाए उसे उतना ही अज्र।
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